🛕 श्रीमद्‍भगवद्‍ गीता 🛕

भगवद गीता अध्याय 6 श्लोक 19 | Bhagavad Gita Chapter 6 Shlok 19

भगवद गीता अध्याय 6 श्लोक 19

Bhagavad Gita Adhyay 6 Shlok 19 में बताया गया है कि जैसे वायुरहित स्थान में दीपक की लौ स्थिर रहती है, वैसे ही एक एकाग्रचित योगी आत्मा के ध्यान में स्थिर रहता है।
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श्लोक:
यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता।
योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः ॥१९॥

Transliteration:
yathā dīpo nivāta-stho neṅgate sopamā smṛitā
yogino yata-chittasya yuñjato yogam ātmanaḥ

अर्थ:

जिस प्रकार वायुरहित स्थान में दीपक हिलता-डुलता नहीं, उसी तरह जिस योगी का मन वश में होता है, वह आत्मतत्त्व के ध्यान में सदैव स्थिर रहता है।

Meaning:
As a lamp in a windless place does not flicker, so is the comparison used for a yogi whose mind is controlled and is absorbed in meditation on the Self.

तात्पर्य:

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति अपने आराध्य देव के चिन्तन में उसी प्रकार अविचलित रहता है, जिस प्रकार वायुरहित स्थान में एक दीपक रहता है।
A person in Krishna consciousness remains unwavering in meditation upon their worshipable Lord, just like a lamp that does not flicker in a windless place.

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

Kartik Budholiya एक आध्यात्मिक लेखक और श्रीमद्भगवद्गीता के जिज्ञासु पाठक हैं। वे प्राचीन भारतीय दर्शन को आधुनिक संदर्भ में समझाने का प्रयास करते हैं ताकि युवा पीढ़ी को मानसिक स्पष्टता और जीवन का सही उद्देश्य मिल सके।